शनिवार, 2 जनवरी 2010


मैं जानता हूं ...मेरी उम्मीदें निराश है

पर ये क्या कोई कम है कि कोई तो पास है

जीकर यहां मरने की सजा सब भुगत रहे

ये जिंदगी तो सिर्फ एक झूठा कयास है

4 टिप्‍पणियां:

  1. प्रिय मित्र ,

    परमपिता , परमेश्वर , जगत्स्वामी , जगेश , सर्त्रव्यापी इश्वर आप सभी को सपरिवार सकुशल ,सुरक्षित एवं आयुष्मान रखे . आप सबकी समस्त आशाओं को ,अभिलाषाओं को एवम स्वपनों को साकार करे.

    आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !

    कुछ फूल, कुछ सितारे और एक चाँद
    थोड़ी सी चाँदनी , नर्म धूप की महक
    धनवर्षा, दहलीज़ पे किस्मत की दस्तक
    मुंडेर पर चुग्गा चुगती चिड़ियों की चहक
    घर में चहकते बच्चे , बतियाते माँ बाप
    चिरागों के बजाये जलते हुए आफ़ताब
    हर चीज़ में बरक्कत , हर शै में इजाफा
    हर मुश्किल तलाशती खुद अपना ही जवाब
    नई सुबह जब आसमान से एक नया सूरज
    धकेल पाँव से निकले जब अँधेरे की चादर
    नए साल की पहली सुनहरी किरन "दीपक"
    मुबारक़ बन के आगोश में ले ले तुम्हें आकर

    नया साल मुबारक़
    नया साल मुबारक़
    नया साल मुबारक़
    aap sab ko navvarsh 2010 ki haardik mangalmay shubhkaamnaaye.

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  2. बढ़िया शुरूआत है.....बधाई स्वीकार करें।

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