शनिवार, 16 जनवरी 2010
अक्सर मुझे इस बात पर खीज होती है कि घर वाले मुझे कोई ऐसा निर्णय नही लेने देते जिसमें रिस्क हो ....कभी कभी सोंचता हूं कि घर वाले चाहते है कि मैं भी उसी एक सामान्य व्यक्ति की तरह जिंदगी गुजारु जैसे ज्यादातर लोग गुजारते है ...मैं मेरा परिवार एक छोटी सी नौकरी ...और दिन भर की दिनचर्या खाया पिया परिवार का हाल जाना और सो गया ....लेकिन ये मेरी फितरत में शुरु से ही नही रहा....क्योंकि मुझे लगता है कि मानव जीवन सिर्फ बच्चे पैदा करने और सिर्फ अपने परिवार तक ही सीमित रहने के लिए नही हुआ है ...बल्कि और भी बहुत कुछ जिसे करने के लिए ये जन्म हुआ है ......लेकिन फिर कभी सोचता हूं कि मेरी मां जो मुझे ऐसा करने से रोकती है वो इसलिए नही रोकती कि वो मेरी प्रोग्रेस नही चाहती बल्कि वो इसलिए कि वो मुझसे इतना प्यार करती है कि वो नही चाहती है कि मेरा कोई भी ऐसा कदम हो जाए जिससे मुझे परेशानी हो ....शायद उसका दिल मेरे दिल कहीं ज्यादा उस समय दुखी हो जाता है जब वो मुझे परेशान देखती है ...ये मुझे नही पता कि उसने मुझे कैसे पाला है क्योंकि शायद तब मैं इतना समझदार नही था लेकिन वो जानती है कि मुझे इतना बडा करने में उसे क्या मुसीबतें उठानी पडी है ...तभी वो मुझे हमेशा ऐसा कुछ करने से रोक देती है जिसमें कोई रिस्क हो ....मुझे पता है कि अगर मैं प्रोग्रेस करुंगा तो शायद ही उससे ज्यादा किसी को खुशी हो लेकिन वो नही चाहती है कि इस खुशी के लिए मुझे दुख के आसूं रोना पडे वो चाहती है मेरी खुशी लेकिन उन आसुओं के साथ जो सिर्फ और सिर्फ खुशी के आंसू हो .....मैं जानता हूं वो हमेशा मेरे साथ नही रहेगी क्योंकि यहां कोई अमर नही है ....वो एक दिन मुझे छोडकर चली जाएगी लेकिन वो इस तरह से जाना चाहती है कि उसे इस बात की फ्रिक न रहे कि उसका लाल परेशानी में है और बेरोजगार है ....शायद ये मां ही तो होती है जो अपने बेटे से प्यार करती है ....उस मां के चरणों में कोटि कोटि प्रणाम
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