
आज हर कोई प्यार का भूखा है ....सभी को प्यार चाहिए और असली प्यार चाहिए मतलब दिल से चाहने वाला ....हर कोई चाहता है कि उसे जो चाहे वो बस उसे ही चाहे और किसी को नही ये बात और है हर व्यक्ति ऐसा चाहने वाला अपने आपसे ऐसी उम्मीद नही ऱखता .....वो अपने लिए फार्मूला रखता है कोई भी दुखियारी उसके दर से खाली न जाए अगर किसी ने प्यार से दो बातें कर ली तो समझो हुजूर लग गये अपने काम में और हाथ आए इस मौके को वो किसी भी तरह से भुनाना चाहते है ....वर्तमान में प्यार के बाजार में भावनाओं की कद्र काफी पहले खत्म हो चुकी थी ....और अहसासों का दायरा भी सिमट गया है अब अगर वर्तमान में कुछ बचा है तो वो है ...उत्तेजना ॥और प्यार का सारा खेल इसी उत्तेजना पर चल रहा है ....अब चूकि उत्तेजना तो अस्थाई होती है इसलिए एक दिन प्यार होता है और दूसरे दिन दिल के खांचे में कोई और फिट हो जाता है। मतलब जितनी देर उत्तेजना उतनी देर प्यार उसके बाद फिर से खेल शुरु हो जाता है प्यार के खेल का ....एक बात गौर करने वाली है ....ज्यादातर हमारे सामने ऐसे किस्से आ रहे है जिसमें कुआरी लडकियां या तो गर्भवती हो जाती है ...या फिर बलात्कार की शिकार हो जाती है ....ये उसी प्यार का ही एक हिस्सा है किस्सा ये भी सामने आता है कि लडके ने बहुत दिनों तक शादी का झांसा देकर लडकी का शारीरिक शोषण करता रहा बाद में उसने शादी करने से मना कर दिया ....ये भी आजकल के चलन में रहने वाले उत्तेजनात्मक प्यार का ही एक हिस्सा है ...लोग भले कहते हो कि प्यार कभी बदलता नही ....लेकिन आज जमाने के साथ प्यार की परिभाषा भी बदली है ...पहले जमाना था जब प्यार भावनाओं के इर्द गिर्द घूमता था लेकिन आज का प्यार कपडो के आसपास स्टैंण्डर्ड के आसपास आपकी खूबसूरती के आसपास घूमता है ....अगर बात करें तो लडकों को आजकल के लडकों को उस लडकी से उतनी ही जल्दी और उतना ही ज्यादा प्यार होता है जितने वो लडकी कम कपडे में दिखती है ....अब प्यार के लिए सादगी और भावनाओं की कद्र करना नही जरुरी है बल्कि सेक्सी होना जरुरी है ....अगर लडकी सेक्सी नही है तो उससे कोई प्यार नही करने वाला और अगर वो सेक्सी है तो हर कोई प्यार करने को तैयार है ...अगर लडकियों की बात करें तो वो जमाना चला गया जब लडकियों को सिर्फ सच्चे दिल से प्यार करने वाला चाहिए होता था ...अगर आपके प्यास किसी लडकी को देने के लिए सच्चे दिल का प्यार है और ईमानदारी की खाने के लिए रोटी दाल है तो आप किसी भी लडकी से प्यार करने का इरादा बदल जाईए क्योंकि अब प्यार के लिए न सिर्फ आपका स्मार्ट होना जरुरी है बल्कि आपके पास गाडी बंगला और सोसाइटी में रुतबा भी होना जरुरी है इतना ही नही अगर आप किसी लडकी को रेस्टोरेंट में ले जाकर उसके साथ डिनर नही ले सकते उसे शॉपिंग नही करा सकते है तो प्यार आपके लिए इतिहास की चीज हो गई है क्योंकि प्यार का जो नया स्वरुप वो अब यही है ......ये किस्से भी इसी प्यार की तस्वीर पेश करते है ......मुलाकात हुई थोडी जान पहचान हुई कि प्यार हो गया ....प्यार हुआ नही कि सपने बनने लगे और इन सपनों में एक जो आम बात होती है वो होती है कभी न जुदा होनी की ....और उसके लिए फिर शुरुआत जिस्म और जान से एक होनी की .....और ऐसा करने के लिए बहुत जल्द ही स्थापित हो जाते है शारीरिक संबध .....शारीरिक संबध होने के बाद प्यार का परवान घटने लगता है......और फिर शुरु हो जाते है आरोप प्रत्यारोप के सिलसिले .....क्योंकि जब तक उत्तेजना थी तब प्यार का बुखार था जैसे ही उत्तेजना खत्म हुई प्यार का बुखार उतर जाता है.....मतलब अब प्यार की गारंटी उतनी ही देर की है जब तक उत्तेजना है ...लोग आजकल प्यार का पात्र का बनने के लिए अपने आपको सजाते है बडी बडी बातें बातें करते है और अपने आपको अट्रैक्टिव बनाने के लिए हर वो कुछ करते है जो किसी को उनकी तरफ अट्रैक्ट कर सके लेकिन किसी की तरफ अट्रैक्ट होना अलग बात है और किसी से प्यार होना अलग बात है आप अगर मल्लिका शेरावत की तरफ अट्रैक्ट होते है तो आपकी दूसरी भावना होगी लेकिन अगर आपको लता मंगेशकर अच्छी लगती है तो उनके लिए आपके जज्बात अलग होगे ......अब इतने तो आप भोले नही है किसी के लिए क्या जज्बात होंगे ये नही समझे ....ये ठीक है कि चहेता बनने के लिए आपका व्यक्तित्व अच्छा हो लेकिन जितना चहेता बनने के लिए आपके कार्य जरुरी है उतना आपका सजना संवारना नही और इसी की मिशाल पेश करते है सचिन तेंदुलकर लता मंगेशकर अमिताभ बच्चन और भी बहुत से लोग है जो इस तरह के है

Khatam hoti Manveeya Samvednao par karari chot hai aapka ye lekh...umeed hai kayi logo ko seekh milegi....Best wishes
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