रविवार, 30 मई 2010


बडा अजीब लगता है जब लोग इतने निराश हो जाते है कि वो अपने आप पर से विश्वास खो देते है ....वो इस अहसास को ही खो देते है जिस अहसास से जिंदगी की बुनियाद बनी होती है ....बहुत सारे लोगों से मेरा मिलना होता है कि क्योंकि पत्रकार का काम ही बकवास और लोगों से मिलना होता है कुछ लोगों से मिलता हूं और जब पूछता हूं तो बोलते है ठीक हूं अरे भाई ठीक हो तो अच्छे क्यों नही हो कुछ भी ऐसा कारण नही होता है जिससे जिंदगी की रपटीली राह पर चलना कठिन हो लेकिन इसके बावजूद लोगों जिंदगी के प्रति बडा हताश निराश देखता हूं ...दुनिया में हमेशा कुछ भी ऐसा नही होता जो हो न सके ....सब कुछ हो सकता है लेकिन मजबूरी कि हम करना नही चाहते....जिंदगी में निराशा हमें इसलिए होती है क्योंकि हम सोचते है कि जो हम सोचते है बस वही सही जबकि ऐसा कई बार ऐसा नही होता है ....जिंदगी कई रंगो से बनी होती है और उसके हर रंग का अपना एक महत्व होता है ...इसलिए हमें चाहिए कि जिंदगी के हर रंग का मजा ले ....अगर खुशी के आसुओं में एक अजीब सा अहसास होता है .... तो गम के आसुओं में भी कई बार फक्र महसूस होता है ....जब किसी मां का जवान बेटा देश के लिए अपने प्राण निछावर करता है ....और लोग उसकी जयजयकार करते है तो मां के आखों में उसे खोने का गम होता है लेकिन इसके बावजूद उसे अपने खून पर फक्र होता है....इसलिए जिंदगी से शिकवा की जगह उसकी रफ्तार और उसकी चाल का मजा लेना चाहिए ....जीत तो तब है जब आप ये कह दे कि हम भी देखतें है कि जिंदगी अपने किन किन रंगो से हमे रुबरु कराती है ...आप माने या न माने लेकिन हकीकत ये है कि जिंदगी के जितने रंगों से गुजर कर आप आगें बढेगें आप उतने ही निखरे और मजबूत बनेगें ....इंद्रधनुष ऐसे ही लोगों को नही लुभाता बल्कि वो कई रंगों से मिलकर बना होता है ....जब वो आकाश में चमकता है तो लोगों को बरबस अपनी और खींचता है ....हर रंग का अपना महत्व होता है ऐसे ही जिंदगी भी कई परिस्थितियों से मिलकर बनी होती है और हर परिस्थिति की अपनी एक अलग कहानी होती है ....उपन्यास हमेशा कहानी से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है ...क्योंकि उसमें कई कहानियां किसी एक व्यक्ति से ही जुडी होती है ....शायद यही वजह है कि वो अपने आपको कहानी से कहीं ज्यादा अच्छी तरह से व्यक्त करता है ॥अगर आप जिदगीं के हर रंग का मजा लेते हुए आगें बढेगे निश्चित ही आप भी इंद्रधनुष की तरह चमकेंगे...लेकिन जिंदगी से कभी शिकवा मत करिये ....कई लोग परिस्थितियों के लिए भगवान को दोष देने लगते है मैं पूछता हूं ईश्वर ने हमें शरीर से अच्छा इस संसार में भेजा न तो हमें अंधा बनाया न हमें लगंडा बनाया न हमें ऐसा बनाया कि हम बुद्दिहीन है फिर हम क्यों उस ईश्वर को दोष देते है ....किसी ने कहा है कि आदमी जितने कष्टों से निकलकर आगें निकलता है वो उतना ही महान बनता है इसलिए जिंदगी से शिकवा नही बल्कि उसके स्वागत करो उससे कहों कि ऐ जिंदगी हम तेरे हर रंग को देखना चाहते है जिससे मरते वक्त ये खुद से गिला न रह जाए कि हमने ये नही देखा ......

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