सोमवार, 7 जून 2010


अधूरापन
किसी के घर को दीवारें भी खुशियों से नहायी है
किसी ने आसुओं से दोस्ती अपनी निभायी है
कोई महलों में बैठा रात दिन सपने संजोता है
किसी का लुट गया सब कुछ किसी की मुंह दिखाई है

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