गुरुवार, 19 मार्च 2009


आज के बिगडे हुए नेताओं ने राजनीति को उस धरातल पर लाकर खडा कर दिया है जहां वो उस वेश्या की तरह हो गई है जिसे अपने मतलब के लिए किसी के साथ हमबिस्तर बनने से कोई गुरेज नही है .....ये सोचने वाली बात है कि नेता बिगड गए है या फिर नीति .......हांलाकि किसी चीज का किस तरह का स्वरुप होगा ये काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि वो चीज किन हाथों में है उदाहरण के लिए अगर कोई गुलाब का फूल किसी हाथ में है तो उसे मसला भी जा सकता है और उसे उन्ही हाथों से किसी देवता के चरणों में चढाया भी जा सकता है दोनों ही अवस्था में उस फूल की कीमत अलग अलग होगी साथ ही उसके लिए भावनायें भी भिन्न होंगी ।यही आज की राजनीति की हालत हो गई है वो आज उन नेताओं के हाथों में है जो उसकी खुश्बू से देश या समाज को महकना नही देना चाहते है बल्कि उसे मसलकर उसका रस निकालकर उसका तेल बनाकर खुद और खुद के परिवार के लिए ऱखना चाहते है ...........राजनीति में सिद्धातों की बात तो बहुत दुर की बात हो गई क्योंकि आज के नेताओं का सीधा फंडा है कि सिंद्दातों की बात करो उन पर अमल मत करो क्योंकि अगर वो ऐसा नही करेंगे तो वो वोट नही बटोर पाऐंगे ........सिद्धात वही कारगर है जो वोट दिला सके इसके अलावा सब बेकार .......आज तक लोगों ने बाजारवाद उपभोक्तावाद नारीवाद सुना था लेकिन इस समय अगर किसी वाद का सबसे उंचा भाव है तो वो है परिवारवाद ,नेताओं की बात कुछ निराली है वो हमेशा कुछ ऐसा करते है जिसका प्रभाव काफी लंबे समय तक रहता है फिर चाहे वह मजहब के नाम पर लोगों को लडाकर वोट बटोरना हो फिर भले ही देश सांप्रदायिक की आग में जलता रहे या फिर जातिवाद का नारा लगाकर समाज के लोगों को बांट देना ........लेकिन इतना जरुर कहना पडेगा कि ये नेता लोग जो करते है उसका लांगटर्म में फायदा जरुर उठाते है ...........यही कारण है कि आज हर कोई नेता बनना चाहता है क्योंकि हर नेता बनने वाले को मालूम वो नेता बनके लांग टर्म में फायदा उठा सकता है .....

1 टिप्पणी:

  1. आप के विचार काफ़ी क्रांतिकारी है. इसी तरह के विचार आज की जरुरत है

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