रविवार, 22 मार्च 2009

अब फिर से बात करते है उन लडकियों की जो शिकार हुई अपने बाप के हवस की .........हो गया खुलासा लेकिन इसके बाद क्या होगा ........जिस बाप ने आपने ही बेटियों के जिस्म को ग्यारह साल से नोचता रहा क्या उसके बाद दुनिया में जो रिश्ते है उन रिश्तों पर विश्वास कर सकेंगी वो .........सबसे बडा सवाल कि अब आगें क्या ........हालांकि उस कलयुगी बाप का चेहरा तो मीडिया में आने से सभी लोग उसकी करतूत जान गयें । लोगों ने ये तो जाना कि बाप कैसा है लेकिन उन्होने ये भी जाना कि किन लडकियों से वो ग्यारह साल तक बलात्कार करता रहा बस सवाल यही है ..........क्योंकि समाज भले ही ये बार बार कहता रहे कि वो बाप गलत है लेकिन हर बार की तरह कहीं न कहीं वो ये सवाल भी उठायेगा कि आखिर क्यों सहती रही ग्यारह साल तक ये जुर्म ......समाज का हमेशा से ही दोहरा मुंहापना दिखा है एक तरफ वो ये भी कहता है कि वो गलत नही है तो दूसरी तरफ वो पीडित को स्वीकार भी करने से हिचकता है ........बहुत से मामलों पर ये देखा गया कि पीडित से लोग सहानुभूति तो जताते है लेकिन जब उन्हे अपनाने की बारी आती है तो यही लोग मुकर जाते है ..........भले ही हमें ये पढाया जाता हो कि हमेशा हमे सत के पथ और न्याय के लिए तैयार रहना चाहिए......लोगों की सहायता करनी ........लेकिन जब ये बातें हकीकत में हमारे सामने आती है तो वही लोग जो हमें ये सिखाते है वही ये कहने लगते है कि क्या तुम्ही ने दुनिया का ठेका ले ऱखा है ........भले ही इन लडकियों के प्रति आज लोग सहानुभूति दिखा रहे हो लेकिन यहीं लडकियां थोडे दिनों बाद जब किसी जगह पर खडी होगी तो लोग इस बात की कानाफूसी करने से नही चूकेंगे कि यही लडकियां थी जिनसे इनका बाप ग्यारह साल तक गलत काम करता रहा .......साथ ही कही भी वो जाएंगी तो अगर लोग उन्हे जानते होंगे निश्चित रुप से वो उस बात की चर्चा करने से पीछे नही रहेंगे......मतलब एक तरफ सहानुभूति तो दूसरी तरफ उनको फिर से वही लौटाना जिस दलदल से वो निकली है ......

शनिवार, 21 मार्च 2009

मुंबई में एक शैतान बाप अपनी बेटियों से लगातार ग्यारह साल से बलात्कार करता रहा .......और जब इसका खुलासा हुआ तो हर कोई इस बात को जानने को बेकरार दिखा कि आखिर कौन है वो बाप जिसने अपने ही खून को बना डाला अपनी हवस का शिकार ......आखि़र बाप को तो सज़ा हुई ....... लेकिन सवाल ये है कि उन बेटियों का क्या होगा जिनकी इज्ज़त आबरु उसी शख्स ने लूटी जिसने कभी उन बेटियों को अपने हाथों के पालने में झुलाया था।.......किस तरह होगा इन बेटियों को अब इंसानी रिश्तो पर विश्वास क्योंकि जब अपनों ने ही ग्यारह साल तक आत्मा पर चोट पहुंचाई हो तो अब किसी दूसरे पर विश्वास करने की कैसे पडेगी हिम्मत .........बहुत सारे सवाल है जो पूछ रहे खुद जवाब हम इस पर चर्चा भी करेंगे .........

गुरुवार, 19 मार्च 2009


आज के बिगडे हुए नेताओं ने राजनीति को उस धरातल पर लाकर खडा कर दिया है जहां वो उस वेश्या की तरह हो गई है जिसे अपने मतलब के लिए किसी के साथ हमबिस्तर बनने से कोई गुरेज नही है .....ये सोचने वाली बात है कि नेता बिगड गए है या फिर नीति .......हांलाकि किसी चीज का किस तरह का स्वरुप होगा ये काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि वो चीज किन हाथों में है उदाहरण के लिए अगर कोई गुलाब का फूल किसी हाथ में है तो उसे मसला भी जा सकता है और उसे उन्ही हाथों से किसी देवता के चरणों में चढाया भी जा सकता है दोनों ही अवस्था में उस फूल की कीमत अलग अलग होगी साथ ही उसके लिए भावनायें भी भिन्न होंगी ।यही आज की राजनीति की हालत हो गई है वो आज उन नेताओं के हाथों में है जो उसकी खुश्बू से देश या समाज को महकना नही देना चाहते है बल्कि उसे मसलकर उसका रस निकालकर उसका तेल बनाकर खुद और खुद के परिवार के लिए ऱखना चाहते है ...........राजनीति में सिद्धातों की बात तो बहुत दुर की बात हो गई क्योंकि आज के नेताओं का सीधा फंडा है कि सिंद्दातों की बात करो उन पर अमल मत करो क्योंकि अगर वो ऐसा नही करेंगे तो वो वोट नही बटोर पाऐंगे ........सिद्धात वही कारगर है जो वोट दिला सके इसके अलावा सब बेकार .......आज तक लोगों ने बाजारवाद उपभोक्तावाद नारीवाद सुना था लेकिन इस समय अगर किसी वाद का सबसे उंचा भाव है तो वो है परिवारवाद ,नेताओं की बात कुछ निराली है वो हमेशा कुछ ऐसा करते है जिसका प्रभाव काफी लंबे समय तक रहता है फिर चाहे वह मजहब के नाम पर लोगों को लडाकर वोट बटोरना हो फिर भले ही देश सांप्रदायिक की आग में जलता रहे या फिर जातिवाद का नारा लगाकर समाज के लोगों को बांट देना ........लेकिन इतना जरुर कहना पडेगा कि ये नेता लोग जो करते है उसका लांगटर्म में फायदा जरुर उठाते है ...........यही कारण है कि आज हर कोई नेता बनना चाहता है क्योंकि हर नेता बनने वाले को मालूम वो नेता बनके लांग टर्म में फायदा उठा सकता है .....