महिलाओं के आरक्षण की बात अभी राज्यसभा से ही आगे बढ पाई थी कि सभी ओर हाय तौबा मच गई .....किसी को बच्चों की चिंता सताने लगी तो किसी को खुद की .....स्वतंत्रता सबको अच्छी लगती है ...और ये बात सभी पर लागू होती है बात चाहे पुरुषों की हो या फिर महिलाओं की ....लेकिन लगता है पुरुष वर्ग में कुछ लोग ऐसे है जो इसे अपनी बपौती मानते है ....हालांकि इसमें उनका कोई दोष नही क्योंकि विस्तार वहीं होता है जहां जगह होती और उनकी दिल दिमाग इस कदर सिकुडे हुए है कि वो दकियानूसी के बाहर जाकर कुछ सोच ही नही सकते ....दूसरी बात जब कोई घटना परपंरागत लीक से हटकर होती है तो ऐसे लोग या फिर समाज जल्दी से उसे स्वीकार नही कर पाता ....ऐसे लोग पहले प्रतिकार करते है और जब देखते है कि धीरे धीरे उस बात की ओर लोग जाने लगे है तो वो उसे स्वीकार कर लेते है ....इन्ही सिकुडे हुए दिमागी लोगों के प्रतिनिधि है कल्बे जव्वाद ....जिन्होने एक आमसभा में ये कहा है कि महिलाएं अच्छे नेताओं को पैदा करने के लिए है न कि खुद नेतागिरी करने के लिए .....शायद वो ये बात भूल गए है कि बच्चे सिर्फ अकेले औरत ही नही पैदा करती है बल्कि उसमें पुरुष भी सहभागी होता है ....मतलब बच्चे में मां बाप दोनों के गुण होते है ....और ऐसे में जब तक कल्वे जव्वाद जैसे लोग होंगे तब तक अच्छे नेता नही पैदा हो सकते क्योंकि एक नेता सिर्फ अपने परिवार को प्रभावित नही करता बल्कि वो देश के लाखों लोगों को प्रभावित करता है ...एक बात और कल्वे जव्वाद इस बात को अच्छी तरह से जानते है कि कोई महिला अच्छे नेता पैदा कर सकती है लेकिन ये बात भूल जाते है कि एक महिला घर की इज्जत को दहलीज के पार ले जाकर उसका सडक पर मजाक भी बना सकती है ....अभिषेक बच्चन की जब शादी हो रही थी तब अभिषेक के साथ शादी होने की बात इन्ही के खानदान की बहू जाह्नवी ने कही थी वो इसलिए नही कि वास्तव में शादी हुई थी बल्कि इसलिए कि इतने बडे सितारे के बेटे के साथ अपना नाम जोडकर उथली पब्लिसिटी पा लें ....मैं ये बात इसलिए कह रहा हूं कि जव्वाद साहब ये अच्छी तरह से समझ लें कि अच्छा कोई पेट से नही बल्कि संस्कारों से बनता है ....और संस्कार पेट के अंदर नही बल्कि बाहर सिखलाये जाते है ....जव्वाद जैसे लोग उन लोगों में है जो दूसरे की पत्नियों को देखकर तो उनकी हर अदा पर चटखारे मारने के बेकरार रहते है लेकिन अपनी बीवी को सात पर्त के अंदर रखने की ख्वाहिश रखते है ....जव्वाद मुस्लिम समुदाय से है और मुस्लिम समुदाय हमेशा से ही महिलाओं की स्वतंत्रता का विरोध करता रहा है ....उसने हमेशा ही औरत को पर्दानसीन एक चीज समझा है न कि एक एक ऐसा अक्स जिसमें भावनाएं है ....क्योंकि अगर उसने ऐसा समझा होता तो जव्वाद जैसे लोग ये बयान न देते कि महिलाएं अगर राजनीति में आना चाहती है तो वो पहले इस्लाम धर्म छोड दे उसके बाद राजनीति में जाएं.....शायद इस्लाम धर्म को जव्वाद जैसे लोगों ने अपने घर की बकरी समझकर रखा कि जब चाहेगें तो वो उसको दुहकर अपना स्वार्थ सिद्द कर लेगें और जब चाहेंगें तो उसे खुला छोड देंगें....जव्वाद जैसे लोग उन लोगों में से है जिनका कोई धर्म नही होता बल्कि ये धर्म को अपना हथियार बनाकर अपनी हार को छुपाना चाहते है ....अभी तक अपनी हर आवाज को महिलाओं के लिए कानून बनाने वाले ये लोग अब इस बात से डर रहे है कि कहीं संसद में बैठकर ये महिलाएं उनके लिए कानून न बनाने लगी ....क्योंकि अगर महिलाओं को लोकसभा और विधान सभा में आरक्षण मिल गया तो न सिर्फ महिलाओं का संसद में बोलबाला हो जाएगा ....बल्कि बहुत सी महिलाएं पर्दे से बाहर भी आ जाएगी और यही बात जव्वाद जैसे लोगों का पेट खराब कर रही है .... अब जरा उन नेताओं की बात कर लेते है जो आरक्षण पर अपनी भृकुटियां ताने हुए है और नही चाहते कि ये आरक्षण कानून बने ...इनमें मुलायम लालू और शरद यादव है .....ऐसा नही है कि आरक्षण के बाद महिलाएं इनसे रोटी बनवाऐंगी या फिर झाडू लगाऐगीं ...बल्कि डर इन्हे इस बात का है कि कहीं इनकी राजनीति की दुकानदारी की बिक्री धीमी न हो जाए .....कई ऐसी पार्टियां जिनसे एक भी महिला जीतकर संसद नही पहुंची ....साथ ही बहुत से ऐसे भी नेता है कि जो एक ही सीट से हर बार जीतकर संसद और विधान सभा में पहुंचते है ....ऐसे लोग महिलाओं के आरक्षण से नही बल्कि अपनी राजनीतिक रोटी के बासी होने से डर रहे है ...और यही वजह हैकि ये लोग इस बिल का विरोध कर रहे है .....
मेरा नाम शांत है .....लेकिन ये मत सोचिए कि मैं शांत हूं .....क्योंकि अगर मैं शांत होता तो शायद आप मुझे पढते ही नही .....हां पहली नजर में आप भी इस बात का धोखा खा जाऐगें कि मैं अपने नाम की परिभाषा को अपने स्वभाव के द्धारा सही सिद्ध कर रहा हूं .....मैं पढता भी हूं लेकिन किताबों को नही चेहरों को, जो इतने सख्त हो गये है कि भावों के निशान को भी नही आने देते ......मैं लिखता भी लेकिन कुछ ऐसा नही जो लोगों के दिल को बहलाए बल्कि कुछ ऐसा जो होने वाले हर चीज पर प्रश्न उठाए कि आखिर ऐसा ही क्यों ....इससे ज्यादा अगर आपको मेरे बारे में जानना है तो निश्चित ही आप मुझे ढुंढ लेंगे फिर मैं क्यों न कहीं भी होउं